पर्यटन पर्व: भारत की विविधता के अन्वेषण का एक विशेष अवसर


.समय आ गया है कि आम पर्यटन स्थलों पर जाने के बजाय भारतीय देश के खूबसूरत नुक्कड़ों, कोनों को खोजें। होटलों में ठहरने के बजाय पारंप.....

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही के संवाद ‘मन की बात’ में लोगों से अपील की कि वे अद्भुत भारत के विभिन्न अद्भुत स्थलों को खोजें। इसी से प्रेरित पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन पर्व का आयोजन किया है जिसे ‘भारतीय समृद्ध पर्यटन धरोहर के उत्सव’ के रूप में माना जा रहा है. केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय अन्य केंद्रीय मंत्रालयों, विभिन्न राज्य सरकारों और निवेशकों के साथ मिलकर पर्यटन पर्व का आयोजन समस्त भारत में 5-25 अक्टूबर, 2017 हो रहा है। इसका उद्देश्य पर्यटन के लाभों पर ध्यान आकर्षित करना, हमारी सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन करना एवं ‘सबके लिए पर्यटन’ के सिद्धांत को सुदृढ़ करना है. यह एक अद्भुत संयोग है कि पर्व-प्रेमी भारत देश में इस पर्यटन पर्व का आयोजन उस समय किया जा रहा है जब देश में त्योहारों कि धूम एवं उत्साह का माहौल है। साथ ही यह समय ऐसा है जब लोग घर व शहर से बाहर निकलकर किसी स्थान पर घूमने का समय निकालते हैं परन्तु आमतौर पर लोग नए, शांत और थोड़े अनजान स्थान खोजने के बजाय उन्हीं पुरानी और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते हैं। समय आ गया है कि आम पर्यटन स्थलों पर जाने के बजाय भारतीय देश के खूबसूरत नुक्कड़ों, कोनों को खोजें, होटलों में ठहरने के बजाय पारंपरिक एवं सांस्कृतिक लोगों के साथ रहें.पर्यटन पर्व यही अवसर देता हुआ दिखाई दे रहा है। भारत सरकार की इस योजना से दो अति महत्त्वपूर्ण बातें मेरी समझ में आई हैं - ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ योजना के अंतर्गत अन्तर्राज्यीय संबध तथा सी.बी.एस.ई. मान्यता प्राप्त विद्यालयों को अन्य गतिविधियों के साथ विरासत रूप स्मारकों की यात्रा हेतु दिशा-निर्देश देना.देखा जाए तो स्कूली बच्चों के लिए स्मारकों के दर्शन का विचार नया नहीं है लेकिन ‘पर्यटन एवं अध्ययन’ से इसे जोड़ना इसे नया बनाता है। 

कल्पना करें कि एक कक्षा महाराष्ट्र के एक किले में बैठकर छत्रपति शिवाजी की विजय के बारे में पढ़ रही हो या अकबर ने क्या किया यह आगरा के किसी किले में बैठकर सीखा जा रहा हो। ये स्मारक ज्ञान एवं जानकारी का खजाना हैं। वे केवल इतिहास के पाठ ही उपलब्ध नहीं कराते बल्कि उस युग के शिल्पकला और परंपरागत प्रथाओं से भी अवगत कराते हैं। वास्तविक दर्शन से बेहतर सीखने का कोई और तरीका नहीं हो सकता.भारत का सौभाग्य है कि यह 3500 से अधिक स्मारकों से संपन्न है और 10,000 अन्य स्मारकों की देख-रेख राज्य सरकारें करती हैं.इसी प्रकार कल्पना करें कि केरल हिमाचल प्रदेश के साथ इस प्रकार का आगमन-निगमन करे या मध्य प्रदेश नागालैंड और मणिपुर के बारे में अधिक जानकारी की खोजबीन करे। कितनी सुन्दर संकल्पना होगी यदि अच्छी तरह स्थापित हो। आदि शंकराचार्य ने चार धामों की स्थापना देश के चार कोनों में और बारह ज्योतिर्लिंगों की स्थापना देश के विभिन्न स्थलों पर इसी संकल्पना सिद्धि के लिए की थी.न केवल तीर्थ स्थलों के लिए परन्तु विस्तृत धरती की समृद्ध परम्पराओं और संस्कृति को जानने के लिए लोगों को अन्य राज्यों, शहरों से भी जुड़ना चाहिए। इसी सोच और ध्येय को धारण कर पर्यटन मंत्रालय ने ‘पर्यटन पर्व’ की संकल्पना की जिससे एक-दूसरे की भाषा, संस्कृति, परंपरा एवं प्रथाओं का ज्ञान प्राप्त कर बेहतर संबंध बने। यह भारतीय एकता एवं अखंडता का सशक्तिकरण होगा... 

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